क्या बिहार एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र को मज़बूत कर सकता है?

खोज बिहार से, जवाब लोकतंत्र के

38ज़िलों में संवाद
12k+नागरिकों की आवाज़ें
6सहयोगी विश्वविद्यालय
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खोज बिहार से, जवाब लोकतंत्र के

बिहार ही क्यों?

वैशाली की सभाओं से नालंदा के प्रांगण तक, बिहार

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सामूहिक निर्णय-निर्माण

वैशाली

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संवाद से सीखना

नालंदा और विक्रमशिला

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जीवन-अनुभवों को सुनना

चंपारण

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भागीदारी और जवाबदेही

जेपी आंदोलन

हम क्या कर रहे हैं

छह तरीकों से यह खोज आगे बढ़ रही है

ज़िला संवाद

बिहार के सभी ज़िलों में खुली बातचीत—पंचायतों से लेकर शहर के वार्डों तक लोकतंत्र के प्रत्यक्ष अनुभवों को सुनना और संजोना।

38ज़िले
120+आयोजित सत्र

विशेषज्ञ संवाद

विद्वानों, इतिहासकारों और अनुभवी लोगों के साथ सुव्यवस्थित चर्चाएँ।

युवा और परिसर सहभागिता

जागरूक युवा नागरिकों के निर्माण के लिए कार्यशालाएँ और वाद-विवाद।

शोध और दस्तावेज़ीकरण

स्वतंत्र शोध और निष्कर्षों का सार्वजनिक संग्रह।

सार्वजनिक कार्यक्रम

सभी इच्छुक लोगों के लिए खुले टाउन हॉल और सभाएँ।

राष्ट्रीय निष्कर्ष

सुनी गई बातों को समेटती एक प्रकाशित रिपोर्ट, सभी के लिए।

झलकियाँ

ज़िलों, परिसरों और सभागारों से

आगामी कार्यक्रम

अगले दौर की बातचीत में हिस्सा लें

ज़िला संवाद: गया

टाउन हॉल, गयासुबह 10:00 – दोपहर 1:00

पंजीकरण

परिसर संवाद: पटना विश्वविद्यालय

सीनेट हॉल, पटना विश्वविद्यालयदोपहर 3:00 – शाम 5:30

पंजीकरण

सार्वजनिक व्याख्यान: संविधानवाद और समुदाय

नालंदा मुक्त विश्वविद्यालयशाम 5:00 – 6:30

पंजीकरण